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शांत चेहरा, सख्त तेवर: ममता कल्याणी ने संभाली पटना की कमान तो दिखने लगा पुलिसिंग का नया अंदाज

पोस्टिंग के बाद लगातार कार्रवाई, अपराध के साथ पुलिस की लापरवाही पर भी नजर

Prashant Kumar
Prashant Kumar
1 October 2026, 1:08 pm• 5 min read

प्रशांत कुमार क्राइम और खोजी पत्रकार है जो पिछले 15 सालों से क्राइम और अन्य मुद्दों पर लिखते है।

शांत चेहरा, सख्त तेवर: ममता कल्याणी ने संभाली पटना की कमान तो दिखने लगा पुलिसिंग का नया अंदाज

पटना : पुलिस की वर्दी अक्सर सख्ती की पहचान मानी जाती है, लेकिन कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जिनकी पहचान उनकी आवाज की ऊंचाई से नहीं, बल्कि फैसलों की दृढ़ता से बनती है। पटना की नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) ममता कल्याणी ऐसी ही अधिकारी के रूप में सामने आई हैं। शांत, शालीन और भद्र व्यवहार के लिए जानी जाने वाली ममता कल्याणी ने जून 2026 में पटना सेंट्रल की जिम्मेदारी संभालने के बाद लगातार कार्रवाई और निगरानी के जरिए अपनी अलग कार्यशैली की छाप छोड़ी है।

लखीसराय के नया टोला, पुरानी बाजार की रहने वाली ममता कल्याणी बिहार पुलिस सेवा की 45वीं बैच की अधिकारी हैं। उनके पिता स्वर्गीय सीताराम मेहता सेवानिवृत्त प्राचार्य थे। राजधानी के मध्य क्षेत्र जैसे संवेदनशील इलाके की जिम्मेदारी मिलना उनके प्रशासनिक सफर में महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।

अपराध हुआ तो कार्रवाई, चूक हुई तो भी जवाबदेही

ममता कल्याणी के कार्यकाल की खास बात यह रही कि पुलिस कार्रवाई का दायरा केवल अपराधियों तक सीमित नहीं रहा। चर्चित बंटी यादव हत्याकांड में जांच के दौरान ड्यूटी में लापरवाही सामने आने पर चार पुलिसकर्मियों के निलंबन की कार्रवाई हुई। यह संदेश साफ था कि अपराध पर कार्रवाई के साथ पुलिसकर्मियों की जवाबदेही भी जरूरी है।

इस मामले में पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया और कई आरोपितों को गिरफ्तार किया। हालांकि, पुलिस की थ्योरी और पीड़ित परिवार के आरोपों में अंतर भी सामने आया। इसलिए इस प्रकरण को ममता कल्याणी के कार्यकाल की कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस जांच की चुनौतियों के उदाहरण के तौर पर भी देखा जा सकता है।

थानों की फाइलों से लेकर जमीन पर पुलिसिंग तक

ममता कल्याणी की कार्यशैली का एक पहलू थानों का निरीक्षण भी है। गर्दनीबाग थाने के निरीक्षण के दौरान उन्होंने लंबित कांडों की जांच की प्रगति की समीक्षा की और वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान पूरा करने तथा समयसीमा का पालन करने के निर्देश दिए।

हालांकि इसी तरह के एक औचक निरीक्षण के दौरान पुलिस अभिरक्षा में मौजूद एक आरोपित के फरार होने की घटना भी सामने आई। घटना ने यह दिखाया कि वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी के बावजूद निचले स्तर की छोटी चूक किस तरह बड़ी चुनौती बन सकती है। मामले के बाद आरोपित की तलाश के लिए टीमें लगाई गईं।

फर्जी अफसरों के नेटवर्क पर भी नजर

सितंबर में सचिवालय थाना क्षेत्र में फर्जी अधिकारी बनकर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले जीजा-साले की गिरफ्तारी के मामले में भी ममता कल्याणी ने पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार आरोपितों के पास से मोबाइल, लैपटॉप, फर्जी पहचान पत्र और सरकारी विभागों से मिलती-जुलती वर्दियां बरामद की गईं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया।

फर्जी अधिकारी बनकर ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर ममता कल्याणी ने लोगों से सतर्क रहने की अपील भी की। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी व्यक्ति के केवल पुलिस या केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी होने का दावा कर देने से उसकी बात को सही नहीं मानना चाहिए।

बाइक चोरी के गिरोह तक पहुंची पुलिस

सितंबर में चोरी की छह मोटरसाइकिलों की बरामदगी और दो आरोपितों की गिरफ्तारी की कार्रवाई भी उनके क्षेत्र में हुई। पुलिस के अनुसार तकनीकी और मानवीय अनुसंधान के आधार पर कार्रवाई करते हुए अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई और चोरी की छह बाइक बरामद की गईं।

संवेदनशील मामलों में खुद मौके पर पहुंचना

राजीव नगर में गोलीबारी के मामले में ममता कल्याणी स्वयं घटनास्थल पहुंचीं और एफएसएल टीम के साथ वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया की निगरानी की। पुलिस ने प्रथम दृष्टया घटना को आपसी विवाद से जुड़ा बताया था और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही थी।

सितंबर के अंतिम सप्ताह में बुद्धा कॉलोनी क्षेत्र में पूर्व वार्ड पार्षद के पति अनिल यादव पर गोलीबारी के मामले में भी पुलिस ने कार्रवाई तेज की। पुलिस के अनुसार मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया और घटना के पीछे पुरानी चुनावी रंजिश की बात सामने आई। ममता कल्याणी ने मामले की जानकारी देते हुए फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी रहने की बात कही।

कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी सक्रिय

पटना के बांकीपुर उपचुनाव के दौरान मतदान केंद्र के पास राजनीतिक कार्यकर्ताओं से जुड़े विवाद के बीच ममता कल्याणी की भूमिका चर्चा में आई। पुलिस का पक्ष था कि सभी को मतदान का अधिकार है, लेकिन मतदान केंद्र के आसपास समूह बनाकर खड़े होने से चुनावी प्रोटोकॉल प्रभावित हो सकता है। इस प्रसंग ने संवेदनशील चुनावी ड्यूटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की उनकी भूमिका को भी सामने रखा।

उपलब्धियों के बीच चुनौतियां भी कम नहीं

किसी भी पुलिस अधिकारी के कार्यकाल को केवल गिरफ्तारियों और बरामदगी की संख्या से नहीं आंका जा सकता। अपराध की रोकथाम, लंबित मामलों का गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, पुलिसकर्मियों की जवाबदेही, जनता का भरोसा और संवेदनशील परिस्थितियों में संतुलित कार्रवाई—ये सभी पुलिसिंग की कसौटियां हैं।

ममता कल्याणी के अब तक के पटना कार्यकाल में इन सभी मोर्चों पर उनकी सक्रियता दिखाई देती है। साथ ही, थाने से आरोपित के फरार होने जैसी घटनाएं यह भी बताती हैं कि व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।

शांत स्वभाव और सधे हुए व्यवहार के पीछे प्रशासनिक सख्ती का यह मेल ही ममता कल्याणी की कार्यशैली को अलग पहचान देता है। जून में पटना सेंट्रल की जिम्मेदारी मिलने के बाद कुछ ही महीनों में सामने आईं विभिन्न कार्रवाइयों से इतना जरूर स्पष्ट है कि उनके लिए पुलिसिंग केवल अपराध के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि निगरानी, जवाबदेही और त्वरित अनुसंधान का भी नाम है।