आजमगढ़ जिले की दस विधानसभा सीटों में से एक अतरौलिया विधानसभा काफी चर्चा में है। इसका कारण है सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर के छोटे बेटे अरुण राजभर, जो अपना राजनीतिक सफर यहीं से शुरू कर रहे हैं। वैसे तो जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों और दो लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी का ही कब्जा है, लेकिन अतरौलिया विधानसभा में पांच बार बलराम यादव जीते हैं। वे प्रदेश में मंत्री भी रह चुके हैं। वहीं, 2012 से ही लगातार तीन बार उनके बेटे डॉ. संग्राम यादव जीत रहे हैं। वर्तमान में बलराम यादव एमएलसी हैं। मतलब, राजनीतिक रूप से पकड़ मजबूत है।
लोगों ने बताया कि इस बार इस सीट पर कांटे की टक्कर है, क्योंकि अरुण राजभर लगातार क्षेत्र में घूम रहे हैं और उनके प्रयास से काफी काम भी हुआ है। जैसे, अहिरौला-कप्तानगंज मार्ग, जिसकी लंबाई 21 किमी है, वह बनवाया जा रहा है। और सिकंदरपुर-नारियांव मार्ग के अलावा भी बहुत सारे कार्य क्षेत्र में करा रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि पिछली बार के विधायक प्रत्याशी प्रशांत सिंह, जो कि निषाद पार्टी से थे, उनके झोली में सीट जाएगी। वहीं, बसपा के लोग भी कह रहे हैं कि उनके प्रत्याशी की जीत होगी।
चुनावी समीकरण क्या है?
पिछले तीन चुनावों की बात करें, तो संग्राम यादव ने 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और उनको 97,486 वोट मिले। उन्होंने बसपा के प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार मिश्रा को 43,620 वोटों के अंतर से हराकर एक बड़ी जीत दर्ज की। वहीं, 2017 में करीबी मामला रहा। इस चुनाव में संग्राम यादव को 74,276 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी कन्हैया लाल निषाद को 71,809 वोट मिले। जीत का अंतर मात्र 2,467 वोट था। वहीं, 2022 में 17,247 वोटों के अंतर से संग्राम यादव ने निषाद पार्टी के प्रत्याशी प्रशांत सिंह को हराया।
अरुण राजभर के आने से क्या बदलेगा अतरौलिया का समीकरण?
ओपी राजभर के छोटे बेटे अरुण राजभर भी अपना राजनीतिक सफर अतरौलिया से शुरू कर रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि क्या संग्राम यादव जीत का चौका लगाते हैं या फिर बदलाव होगा। ओपी राजभर भी लगातार अतरौलिया में घूमकर प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। क्षेत्र में ग्रामीण सड़क की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में अहिरौला-कप्तानगंज मार्ग बनवाना और गांवों की 16 मुख्य सड़कों का आरसीसी, इंटरलॉकिंग व पिच निर्माण कार्य करवाना ओपी राजभर के बेटे के राजनीतिक सफर पर कितना असर डालता है, ये तो चुनाव परिणाम से पता चलेगा। लेकिन जिस तरह सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पिछले दो साल से क्षेत्र में घूम रहे हैं और लोगों से मिल रहे हैं, वह कहीं न कहीं असर तो करेगा।


