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रवि किशन ने किया 'जागरण फिल्म फेस्टिवल- गोरखपुर' का उद्घाटन

3 दिनों में यहां हनुमान अंश, शिकायतें, धनक, बोध, इक्कीस जैसी बेहतरीन फिल्में दिखाई जाएंगी

Aditya Mishra
Aditya Mishra
26 September 2026, 1:27 pm• 2 min read

डॉ. आदित्य मिश्रा, मीडिया शिक्षक, पत्रकार और स्टोरी टेलर हैं। राजनीति, सिनेमा, साहित्य और संस्कृति आदि विषयों पर लेखन करते हैं। विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं, शोध पत्रिकाओं और पुस्तकों में दर्जनों लेख व शोध पत्र प्रकाशित हैं। जनसंचार में एम.फिल. और 'फिल्म एंड थिएटर' में पीएच-डी. किया है। किताबें पढ़ने, सिनेमा व नाटक देखने, मंच से संत-महात्माओं, महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों और समसामयिक विषयों पर दास्तान सुनने - सुनाने का शौक है।

रवि किशन ने किया 'जागरण फिल्म फेस्टिवल- गोरखपुर' का उद्घाटन

गोरखपुर के सिटी मॉल स्थित आइनॉक्स में शुक्रवार को जागरण फिल्म फेस्टिवल का आगाज हुआ। इस फेस्टिवल की शुरुआत लोकप्रिय अभिनेता और गोरखपुर सदर सांसद रवि किशन ने दीप प्रज्ज्वलित करके की।
गोरखपुर में फिल्म फेस्टिवल के बारे में कहा कि थिएटर हाउसफुल हो गया है, लोगों के बैठने की जगह नहीं है। फेस्टिवल को लोगों का प्यार मिल रहा है, यह गोरखपुर वासियों के फिल्म व कला के प्रति प्यार व सम्मान है कि यह फेस्टिवल सुपरहिट हो रहा है। 3 दिनों में यहां हनुमान अंश, शिकायतें, धनक, बोध, इक्कीस जैसी बेहतरीन फिल्में दिखाई जाएंगी। आप लोग इन फिल्मों को देखिए।

इस अवसर पर रवि किशन से उनके करियर और फिल्म फेस्टिवल को लेकर शहर की मशहूर आरजे प्रीति ने कई सवाल किए। जिनमें एक सवाल यह भी रहा कि फिल्मी करियर के शुरुआती 15 साल रवि किशन ने बिन पैसे के (कम पैसे में) काम किया और 34 साल बाद आज दुनियाभर में सफलता मिल रही है? इस पर रवि किशन ने कहा कि शुरुआत में अपमान, धोखा, रिजेक्शन, बिन पैसे काम, पूरे पैसे ना मिलना जैसी परिस्थितियों से गुजरा हूं। आज सफल हूं, मगर यहां तक रेंग कर आया हूं तो मेरा शरीर और आत्मा छलनी भी हुई है। भोजपुरी में काम किया है, हिन्दी की 'लापता लेडीज' में काम किया जो आस्कर तक गई है। बचपन में पिताजी सरकारी नौकरी में भेजना चाहते थे। किसान और दूध बेचने जैसे काम मेरे सामने थे। मगर मौका मिला, मुंबई पहले बंबई हुआ करता था, जिसे मैंने पैदल नापा, संघर्ष किया। इस समय कोई नया बच्चा इस फील्ड में आएगा तो उसके सामने बहुत सारे अवसर हैं। पहले सिर्फ सिनेमा और दूरदर्शन दो ही विकल्प हुआ करते थे। आज के समय में बहुत सारे विकल्प हैं ओटीटी आ गई है, डिजिटल वर्ल्ड है, बहुत बड़ी आज दुनिया हो चुकी है। वेबसीरीज आज इतनी बन रही हैं, अनगिनत चैनल आ चुके हैं। अपनी सफलता का गुरु गोरक्षनाथ और गोरखपुर की धरती से रिश्ता जोड़ते हुए कहा कि मेरी सफलता में गुरु गोरक्षनाथ का आशीर्वाद है। गोरखपुर की धरती का आशीर्वाद है।
गोरखपुर के लोग कला के प्रति ऊर्जा से भरे हैं। यहां हो रहे नाटकों में खूब दर्शक आते हैं। यहां के संस्थानों से प्रशिक्षित छात्र एनएसडी जैसी जगहों पर चयनित हो रहे हैं। कलाकारों को सफलता मिल रही है। फिल्म फेस्टिवल जैसा आयोजन गोरखपुर में होना कलाकारों की दृष्टि से भी अच्छा है।