बरसात तो आपने खूब देखी होगी, सड़कों और गलियों में लगे पानी पर पक्ष-विपक्ष के बीच नोंक-झोंक भी सुना होगा, लेकिन इस बार गोरखपुर की सड़कों और गलियों में लगे पानी को निकालने को लेकर दो नेताओं के बीच मोबाइल पर जो तकरार हुई, वह शायद ही कभी देखी -सुनी होगी! मामला बीजेपी से जुड़ा है, चुनावी मौसम भी है, ऐसे में ये चर्चा गोरखपुर से होते हुए दिल्ली तक पहुंच चुकी है और भाजपा के जिम्मेदार भी सक्रिय हो गए हैं।
दरअसल गोरखपुर में 26 सितंबर को हुई मूसलाधार बारिश से गली मोहल्लों में पानी भर गया। इसके बाद बेतियाहाता के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने सदर सांसद रवि किशन को कॉल करके गली-मोहल्लों में लगे पानी को निकालने के लिए रेगुलेटर खुलवाने की बात कही। इस बातचीत में दोनों तरफ से कुछ ऐसी बातें हुईं जिसका निहितार्थ निकाला जा रहा है। दोनों के बीच हुई बातें इस प्रकार हैं -
पार्षद - अरे माननीय सांसद जी प्रणाम! और क्या हाल चाल है?
सांसद - बढ़ियां-बढ़ियां! कहिए!
पार्षद -अरे पूरा शहर बताइये डूब गया है, अरे आप अधिकारियों को फोन करिएगा! पूरे वार्ड में... स्थानीय जनता...कम से कम सैकड़ों दुकानों में पानी घुस गया...लाखों-करोड़ों का नुकसान हो गया...अब जो स्थिति है. अब क्या कहा जाए... न तो पुरानी रेगुलेटर चालू है न पाम पैराडाइज के सामने वाला रेगुलेटर खुला हुआ है।
सांसद- अभी बात करते हैं.
पार्षद - आपको पता नहीं है क्या अभी तक?
सांसद - अरे हम यहीं पर हैं. सब देख रहे हैं -केकरा के सुनावत हव?
पार्षद - सांसद जी देख रहे हैं तो चलिए निकला जाए. जनता का दुख दर्द कौन देखेगा, अगर आप नहीं देखेंगे तो....बताइये ?
सांसद - अरे पार्षद जी निकलल हईं. कहां बाड़?
पार्षद - आप कहां हैं? बताइये वहीं आ जाएं. तारामंडल में हैं, बताइये कहां आ जाएं?
सांसद - नौका विहार में.
पार्षद -ठीक है नौका विहार में हम आ रहे हैं.
सांसद- तरकुलानी चालू हो गया. सामने खड़े हैं हमारे...
पार्षद - अरे महाराज, अगर तरकुलानी और पाम वाला चालू होता...वार्डों में... सुनिए-सुनिए हम बतादें.... 14 सालों बाद ऐसे-ऐसे जगहों पर पानी लगा है...जहां कभी पानी नहीं लगता था...स्थिति ये है... आखिर एतना नाली-नाला किसलिए बना है...पानी लगने के लिए नहीं बना है ना सांसद जी.... अगर रेगुलेटर सही टाइम पर ऑपरेट नहीं होगा तो पानी भरबे करेगा!
सांसद - सब चालू बा, केकरा के सुनावत हव हो....पार्षद जी?
पार्षद - सांसद जी आपको सुना रहे हैं आपको!
सांसद - पूरा चालू बा...ब्राह्मण देवता....ब्राह्मण देवता!
पार्षद - अरे सांसद जी, यहां ब्राह्मण और उसकी बात नहीं है.... पूरा शहर डूब रहा है, आपको ब्राह्मण देवता-ब्राह्मण देवता दिख रहा है!
सांसद - सपा ज्वाइन कर लिए हैं क्या? सपा वाली बात कर रहे हो...सपा के नेता हो गइल का?
सांसद - अरे मतलब आप तो ऐसी बात बतिआ रहे हैं...पानी अगर भर जाए तो सपा आदमी ज्वाइन कर लिया?
सांसद - अरे पूरे तरकुलानी (अधूरा बोल पाए)...
पार्षद - आप क्या ज्वाइन कर लिए सांसद जी, आप बसपा ज्वाइन कर लिए क्या?
सांसद - हेल्लो पार्षद जी...का भइल हो?
पार्षद - नहीं आप बसपा ज्वाइन कर लिए हैं? हमको कह रहे हैं हम सपा ज्वाइन कर लिए हैं!
पार्षद - का हो गइल...का हो गइल अचानक...कइसे अइसे बात करत बाड़?
पार्षद - नहीं अइसे नहीं बात कर रहे हैं, आप कह रहे हैं सपा ज्वाइन कर लिए क्या, तो आप बसपा ज्वाइन कर लिए हैं क्या?
सांसद - सब चालू है, तरकुलानी चालू बा!
पार्षद - तरकुलानी चालू है तो पूछिए अधिकारियों से कि पानी क्यों नहीं निकल रहा है, इतना तो आप पूछ ही सकते हैं, आप कह रहे हैं सपा ज्वाइन कर लिए हैं!
सांसद - अभी बात करते हैं, अभी बात करते हैं.
पार्षद - हां करिए, बात करिए, बात काम की करिए, आप कह रहे हैं सपा- बसपा! यहां आदमी की समस्या...
थोड़ी देर बाद पार्षद नौका विहार पहुंच गए, सांसद रविकिशन को कॉल किया, उसके बाद...
पार्षद - ...नौका विहार पर हैं- तो नौका विहार हम पहुंच चुके हैं, 6 बजकर 56 मिनट हो रहा है, वो बताएं कि वो जनता के बीच में हैं, नौका विहार के आस-पास, फोन कर रहे हैं, उठाया नहीं जा रहा है सांसद जी द्वारा, इसका मतलब कि 'सांसद जी आम आदमी से तो झूठ बोलते हैं, जनप्रतिनिधियों से भी झूठ बोलते हैं माननीय सांसद जी', कम से कम इस भयानक पानी में स्थानीय सांसद जी को जनता के बीच होना चाहिए था, वार्डों का निरीक्षण करना चाहिए था, कहां पानी लगा है, कहां नहीं लगा है, कहां जल-निकासी प्रभावित है, कहां जल-निकासी दुरुस्त है, कहां पानी रुक रहा है, कहां क्या हो रहा है, लेकिन सांसद जी का पता नहीं है, सांसद जी मुझे कहे कि नौका विहार में हूं, तूं कहां बाट? हम फिलहाल नौका विहार में हूं लेकिन सांसद जी के पता नाहीं बा!
मौसम बरसात के साथ - साथ चुनावी भी है। बात सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक पहुंच चुकी है और उन्हें बीजेपी पर हमले का मौका भी मिल चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि गोरखपुर के बेतियाहाता क्षेत्र के पार्षद ने ‘सांसद जी- सांसद जी’ कहकर गोरखपुर के सांसद रवि किशन को खूब सिखाया कि जमीन पर उतरकर समाजसेवा कैसे की जाती है!
सांसद जी प्रणाम से शुरु होकर मामला, 'सांसद जी आम आदमी से तो झूठ बोलते हैं, जनप्रतिनिधियों से भी झूठ बोलते हैं', तक पहुंच चुका है। दोनों नेता भाजपा के ही हैं। मौसम, बारिश के साथ-साथ चुनाव का भी है, ऐसे में संगठन का सक्रिय होना लाज़मी है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने सांसद और पार्षद से फोन पर बातचीत की है और पार्षद को दिल्ली बुलाया है।
देखना यह है कि संगठन अपने 'कर्मठ, साहसी और संस्कारी' पार्षद जिन्होंने सांसद को प्रणाम कहकर बात शुरु की, जमीन पर उतरकर जनसेवा कैसे की जाती है सिखाया और 'सांसद जी आम आदमी से तो झूठ बोलते हैं, जनप्रतिनिधियों से भी झूठ बोलते हैं, कहकर खत्म की', उनकी 'कर्मठता, साहस और संस्कार' का इनाम देकर उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपता है या मोबाइल की बात रिकॉर्ड कैसे हो गई, सोशल मीडिया पर क्यों आ गई, आपको पता कैसे नहीं चला, जैसे सवाल करके पार्षद की नियत पर सवाल उठाकर उन्हें संभलकर चलने की हिदायत देता है। संगठन सांसद रवि किशन को क्या कहता है, इस पर भी सबकी निगाहें हैं।


